Friday, March 11, 2011

क्षमा कीजिए शांति पाइए

तब पतरस ने पास आकर, उससे कहा, हे प्रभु, यदि मेरा भाई अपराध करता रहे, तो मैं कितनी बार उसे क्षमा करूँ ?, क्या सात बार तक ?
यीशु ने उससे कहा, मैं तुझसे यह नहीं कहता कि सात बार, वरन सात बार के सत्तर गुने तक।
- बाइबिल, मत्ती, 21-23

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3 comments:

सारा सच said...

nice

कुमार राधारमण said...

यदि दोनों पक्ष इसे सैद्धांतिक रूप से भी स्वीकार कर सकें,तो व्यवहार रूप देने की नौबत ही न आए।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

यह तो रहस्य है कि पहले मुर्गी आई या अण्डा!
कोई नही जानता कि पहले आकाश बना या ज़मीन!
यह तो परमेश्वर ही जानता है!
मगर इतना तो तय है कि जब तक नेक इन्सान रहेंगे तब तक क्षमा जीवित रहेगी!
क्योंकि क्षमा का पाठ भी खुदा के नेक बन्दे ही पढ़ा सकते हैं!
चाहे बाइबिल हो या वेद हो या कुरआन शरीफ, सभी इन्सान को नेक राह दिखाते हैं!